मुझे तो उज्जैन के महाकाल का दीदार चाहिए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना कोठी ना बंगला ना मुझे कार चाहिए,

मुझे तो उज्जैन के महाकाल का दीदार चाहिए।।

दुनिया के सब झूठे रिश्ते मेरे समझ ना आवे,

जब से देखा उज्जैन में महाकाल नजर ही आवे,

नंदी के असवार की दरकार चाहिए,

मुझे तो उज्जैन के महाकाल का दीदार चाहिए।।

हर सावन में उज्जैन नगरी कावड़ लेकर आऊं,

झूम झूम के महाकाल के भजनों में खो जाऊं,

महाकाल के भक्तों में मेरा नाम चाहिए,

मुझे तो उज्जैन के महाकाल का दीदार चाहिए।।

संजय अमन तो महाकाल से इतनी अर्ज लगावे,

दुनिया चाहे रूठे हमसे भोले तू अपनाले,

महाकाल के चरणों में स्थान चाहिए,

मुझे तो उज्जैन के महाकाल का दीदार चाहिए।।

ना कोठी ना बंगला ना मुझे कार चाहिए,

मुझे तो उज्जैन के महाकाल का दीदार चाहिए।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।