गुरु जी मेरे संग रहना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे बंसी वाले महाराज,

गुरु जी मेरे संग रहना-2

हर मोड़ पे रखियो लाज,

तुम रखियो मेरी लाज

गुरु जी मेरे संग रहना

मेरे बंसी वाले महाराज,

गुरु जी मेरे संग रहना...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।