हूँ क्यों करा परवाह मैं जग दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जद दा तेनु भूल गया सी माँ कखा वांगु रुल गेया सी माँ,

मतबल खोरी दुनिया ने जद दा मेनू ठुकराया

हूँ क्यों करा परवाह मैं जग दी तू जद दा चरनी लाया

मैं गलतिया दा सी पुतला माये तू फिर भी कीने राह दिखाए,

जो मुसीबता मेरे ते पाईया करदा तू सफाया

हूँ क्यों करा परवाह मैं जग दी तू जद दा चरनी लाया

सब कुछ सी अपना मैं खोया दर दर दा मोहताज सी होया,

ठागिया मारण रोकेया मेनू तू करना दान सिखाया

हूँ क्यों करा परवाह मैं जग दी तू जद दा चरनी लाया

दयाल पूरी दी एह कहानी लिखदी ओहदी कलम निमानी,

मिठड़े मिठड़े बोला नाल लख विंदर ने गाया

हूँ क्यों करा परवाह मैं जग दी तू जद दा चरनी लाया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।