रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

ज पेड़ हमने लगाया पेहले उसी का फल हम अब पा रहे है

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

इसी धरा से शरीर पाए इसी धरा में फिर सब पाए,

है सत्य नियम यही धरा इक आ रहे है इक जा रहे है

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

जिहनो ने बेजा जगत में जाना तेह कर दिया लोट कर फिर से आना

जो बेजने वाले है धरा पर वही फिर वापिस बुला रहे है

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

बैठे है जो धान की बालियो में समाये मेहँदी की लालियो में,

हर ढाल हर पत्ते में समा कर रंग बिरंगे फूल खिला रहे है

रचाई श्रृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये श्रृष्टि चला रहे है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।