मुझको दे सवर ज्ञान मैं नित नित तेरी महिमा गाऊ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझको दे सवर ज्ञान मैं नित नित तेरी महिमा गाऊ

कंठ में करो निवास ताल से परे कभी न जाऊ

मुझको दे सवर ज्ञान ...........

वीणा धारी हंस सवारी महका दो तुम सवर की प्यारी,

जब मैं गाऊ वंदना तेरी तुम ही रखना लाज हमारी,

तबला भजे फिर मैं भी तान लगाऊ

कंठ में करो निवास ताल से परे कभी न जाऊ

मुझको दे सवर ज्ञान ...........

ज्ञान यग्य की ज्योत जगा दो हर घर शिक्षा से चमका दो

किरपा तेरी माँ हो सब जन पर ऐसा ही कुछ कर्म कमा दो

लवली की माँ आस यही है दर्श तेरा कर पाऊ

कंठ में करो निवास ताल से परे कभी न जाऊ

मुझको दे सवर ज्ञान ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।