॥ पावन पाठ ॥
यह दुनिया पागल खाना है
यहाँ पागल आते जाते है
और मेरा मेरा कहने वाले,
वो भी पागल बनकर जाते है,
कोई पागल है धन दौलत का,
कोई पागल बेटे नारी कई,
असली पागल तो वो पागल ,
जो पागल बांके बिहारी का,
यह दुनिया पागल खाना है
यहाँ पागल आते जाते है
और मेरा मेरा कहने वाले,
वो भी पागल बनकर जाते है,
कोई पागल है धन दौलत का,
कोई पागल बेटे नारी कई,
असली पागल तो वो पागल ,
जो पागल बांके बिहारी का,