गौरा गणपत तेरे संग विराजे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गौरा गणपत तेरे संग विराजे,

अद्भुत छवि है साजे,

गौरा गणपत तेरे संग विराजे

गंगा जल भर के कावड लाऊ पूरी श्रधा से भोले तुम्हे नेहलाऊ

भोले शंकर तुम देव हो साखे

अद्भुत छवि है साजे,...

सनान करा के तुम को सजाऊ इतर अधीर भोले तुम को लगाऊ,

और चडाऊ बेल और पाते,

अद्भुत छवि है साजे,

मेरे जीवन की ये एक लगन है

रात दिन तेरी पूजा मेरा धर्मं है

चरणों की धूलि से तिलक लगादे,

अद्भुत छवि है साजे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।