दुनिया जिनकी लीला की हर घडी दीवानी है

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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया जिनकी लीला की हर घडी दीवानी है

उनके चमत्कारों की सुनलो ये कहानी है

दुनिया जिनकी लीला की हर घडी दीवानी है

दो सौ मिल दूर पर लगी आग यु बुझाया था

एक लोटा पानी को धुनी में चढ़ाया था

आज तक नही कोई भेद ये बता पाया

दादाजी की धुनी में आग है पानी है

दुनिया जिनकी लीला की हर घडी दीवानी है

एक दिन तो दादा ने ये अजिब काम कर दिया

डाल कर के धुनी में लाश में भी जान भर दिया

दुनिवाले दादा के तपोबल के आगे तो

मौत का भी यमराजा हुआ पानी पानी है

दुनिया जिनकी लीला की हर घडी दीवानी है

उनके चमत्कारों की सुनलो ये कहानी है

दुनिया जिनकी लीला की हर घडी दीवानी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।