मेरे दादाजी ने खंडवा में धुनी रमायी रे

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे दादाजी ने खंडवा में धुनी रमायी रे

धुनी रमायी रे अखंड ज्योत जलई रे

देखो पैदल चल के आये रे देखो धुनी रमायी रे

जहाँ धुनी रमायी रे अखंड ज्योत जलई रे

मेरे दादाजी ने खंडवा में धुनी रमायी रे

देखो निशान लेके आये रे जहाँ धुनी रमायी रे

जहाँ धुनी रमायी रे अखंड ज्योत जलई रे

मेरे दादाजी ने खंडवा में धुनी रमायी रे

गुरु पूनम मेला लागे रे जहाँ धुनी रमायी रे

जहाँ धुनी रमायी रे अखंड ज्योत जलई रे

मेरे दादाजी ने खंडवा में धुनी रमायी रे

भक्त करते है भंडारे रे जहाँ धुनी रमायी रे

जहाँ धुनी रमायी रे अखंड ज्योत जलई रे

मेरे दादाजी ने खंडवा में धुनी रमायी रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।