हँसा के क्यों रुलाए रे रुलाए रै कन्हैयाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हँसा के क्यों रुलाए रे रुलाए रै कन्हैयाँ,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे।

रोके रुके ना आँख के आँसू,

उमड़ उमड़ ये बरसे रै,

तुझ बिन कौन सुनेगा मेरी,

जाऊं कहाँ तेरे दर से रे,

रुठ गई क्यों मुझसे बहारें,

बता दे रे कन्हैयाँ,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे।

फूल खिलाकर ख़ुशियों के ये,

ये क्या हुआ मुख मोड़ लिया,

हाथ पकड़ कर चलने वाले,

काहे अकेला छोड़ दिया,

आशा जगा के चरण लगा के,

सताए क्यों कन्हैयाँ,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे।

चाँद बिना क्या चाँदनी लहरी,

दिप बिना क्या बाती रे,

ये धरती पालन हारे बिन,

कैसे रहे मुस्काती रै,

भूल भूला दे फिर से हँसा दे,

हसा दे रे कन्हैयाँ,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे,

ठाकुर मेरे, ओ ठाकुर मेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।