मेरा भोला पिवे भंग

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरा भोला पीवे भंग निमितया सी बडती जावे से

कही गोरा ल्यावे भंग घनी तू क्यों इतरावे से

भंग घोट के भोले मैं हारी मैं तो अपने पीहर जा रही

तू तो पी के मस्त मलंगा क्यों मेरी रेल बनावे से

मेरा भोला पीवे भंग ..........

भंग के पीवे भर भर लोटे क्यों कर रही से घनी तू टोटे

रे तेरे देख के कुंडी सोटे घनी मेरी आफत आवे से

मेरा भोला पीवे भंग .......

जाउंगी अब पीहर भोले गोरा करे बेकार के रोने,

भोले अब न घोटू भंग आदत तेरी बदती जावे से

भोले तेरे चरणों में जा के प्रियंका शीश झुकावे से

मेरा भोला पीवे भंग ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।