श्याम नाम की सर पे है छतरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम नाम की सर पे है छतरी,

काँटों भरी कोई राह नहीं,

ग़मों की बारिश आ जाए तो,

हमें कोई परवाह नहीं।

श्याम नाम की सर पे है छतरी,

काँटों भरी कोई राह नहीं,

ग़मों की बारिश आ जाए तो,

हमें कोई परवाह नहीं।

साए मैं हूँ श्याम नाम के,

हमें धूप की फ़िकर नहीं,

चाहे ओले बरसे दुखों के,

हमको कोई असर नहीं,

हमकों कोई असर नहीं,

हमसे बड़ा कोई शाह नहीं,

ग़मों की बारिश आ जाए तो,

हमें कोई परवाह नहीं।

श्याम नाम की सर पे है छतरी,

काँटों भरी कोई राह नहीं।

क्यों आँधी से घबराऊँ मैं,

आगे मेरा श्याम चले,

नहीं छोड़ता पल भर मुझको,

साथ वो सुबह शाम चले,

पल भर को भी श्याम की मुझसे,

हटती निग़ाह नहीं,

ग़मों की बारिश आ जाए तो,

हमें कोई परवाह नहीं।

श्याम नाम की सर पे है छतरी,

काँटों भरी कोई राह नहीं।

जबसे हूँ मैं उसकी नजर में,

नजर मेरी कभी झुकी नहीं,

आँगन में बरसात ख़ुशी की,

पल भर को भी रुकी नहीं,

सब कुछ पाया श्याम के दर से,

रही मुझे कोई चाह नहीं,

ग़मों की बारिश आ जाए तो,

हमें कोई परवाह नहीं।

श्याम नाम की सर पे है छतरी,

काँटों भरी कोई राह नहीं।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।