पधारों शबरी के मेहमान शबरी के मेहमान पधारो

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

पधारों शबरी के मेहमान शबरी के मेहमान पधारो,

बिना प्रेम दुर्योधन की ग्रह छोड़ चले पकवान,

रूखे साग विदुर घर खायो प्रेम सहित सुख मान,

पधारो शबरी के भगवान पधारों, शबरी के मेहमान,

शबरी के मेहमान पधारों.....

द्रुपद सुता की लाज बचाई मध्य सभा में आय,

खींचत चीरा दुशासन हारा चूर कियो अभिमान,

पधारो शबरी के भगवान पधारों, शबरी के मेहमान,

शबरी के मेहमान पधारों.......

जल डूबत गजराज उबारे तात शब्द सुन कान,

सारथि बन पारथ रथ हाक्यों समर भूमि मैदान,

पधारो शबरी के भगवान पधारों, शबरी के मेहमान,

शबरी के मेहमान पधारों.........

गणिका गिद्ध अजामिल पापी तारे अधम महान,

भिक्षु अति है शरण तुम्हारी मीरा के भगवान,

पधारो शबरी के भगवान पधारों, शबरी के मेहमान,

शबरी के मेहमान पधारों.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।