आये है मेरे रघुनाथ सुनी भरत ने जब ये बात

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

आये है मेरे रघुनाथ सुनी भरत ने जब ये बात,

सिया राम लखन के साथ साथ हनुमान भी आये

भरत मन में हरषाए राम जब वन से आये संग हनुमत को भी लाये,

आये है मेरे रघुनाथ सुनी भरत ने जब ये बात,

जब सुनी राम के मुख से महावीर की गोरव गाथा

बजरंगी के चरणों पर झुक गया भरत का माथा

कहा भरत ने जोड के हाथ ध्यन हुआ दर्शन पाके

भरत मन में हरषाए राम जब वन से आये संग हनुमत को भी लाये,

आये है मेरे रघुनाथ सुनी भरत ने जब ये बात,

हनुमान जो न होते तो कौन संजीवनी लाता

माँ सिया की सुध लेने को था कौन जी लंका जाता

पाताल से तुम ही नाथ लखन और राम बुलाये

भरत मन में हरषाए राम जब वन से आये संग हनुमत को भी लाये,

आये है मेरे रघुनाथ सुनी भरत ने जब ये बात,

श्री राम चन्द्र को तुम ने संकट से सदा उभारा,

हर जन्म में संकट मोचन मैं रहूगा रिनी तुम्हारा

मुझे रहेगा हर पल याद गाव तुम राम के आये

भरत मन में हरषाए राम जब वन से आये संग हनुमत को भी लाये,

आये है मेरे रघुनाथ सुनी भरत ने जब ये बात,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।