दिल तदपदा जान तदपदी

श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रीत की रीत को ना समझे, हाए वो प्रीत निभाना क्या जाने,

जिस दिल ने चोट ना खाई हो, वो नीर बहाना क्या जाने,

तू की जाने सावरिया, हो तू की जाने सावरिया

की दुखारे होंदे ने,

तू की जाने सावरिया की दुखारे होंदे ने,

दिल तदपदा जान तदपदी,

ते नैना रोंदे ने,ते नैना रोंदे ने,

सादे नैना रोंदे ने,सादे नैना रोंदे ने,

इश्क़ तेरे ने सानू प्रीटो, जाग सारा भूलवाया है,

जाग सारा भूलवाया है, जाग सारा भूलवाया है,

तेरे पीछे मई सब्नू चढ़ेया फिर भी तू नि आया है,

नींद ना आव सानू, हो प्रीतम परेया, हो मेरे मान मोहना,

ते जाग वेल सोंदे है,ते जाग वेल सोंदे है,

नींद ना आव सानू,ते जाग वेल सोंदे है,

दिल तदपदा जान तदपदी.........

प्रेम ते रोगी जाग दे न्यारे मारे दुनिया ताने वे,

मारे दुनिया ताने वे,मारे दुनिया ताने वे,

चुप चुप रेह्न्दे कुच्छ ना केह्ंदे तेरे प्रेम दीवाने वी,

तेरे प्रेम दीवाने वी,तेरे प्रेम दीवाने वी,

लूट जांदे ओये हा मॅर जंदे होये,

हो प्रीतम प्यारेया मेरे मान मोहना,

लूट जांदे होये तेरे खातिर सा कुछ खोंदे ने,

मार जांदे तेरे वास्ते सब कुच्छ खोंदे ने,

दिल तदपदा जान तदपदी..........

तीर छलके नैना दे तू च्छूप गया ओह हरजाई वी,

च्छूप गया ओह हरजाई वी,च्छूप गया ओह हरजाई वी

रॉंड रॉंड नैना ऑट, सावन दी रुत आई वी,

सावन दी रुत आई वी, सावन दी रुत आई वी,

बिन तेरे होये तेरे बिन, ओह प्रीतम प्यारेया ओह मेरे मान्नमोहना,

तेरे बिन इस दिल दे टुकड़े टुकड़े होंदे ने,

बिन तेरे सादे दिल दे टुकड़े टुकड़े होंदे ने,

दिल तदपदा जान तदपदी.........

तू की जाने सावरिया,

हो तू की जाने सावरिया

की दुखारे होंदे ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।