मेरी हर गल पूरी हुंदी आई

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरु जी ने जिन्दगी बनाई मेरी हर गल पूरी हुंदी आई

शुकराना तेरा करन मैं आई मेरी हर गल पूरी हुंदी आई,

मेरे सारे रुके कम पुरे होये दूर मेरे सारे गम होए,

जग नालो तू ता वखरी निभाई मेरी हर गल पूरी हुंदी आई,

मैं गुरु जी कोल दोडी दोडी आई

ओहने हर ख़ुशी मेरी झोली पाई ,

कदे भी न मेरी गल ठुकराई

मेरी हर गल पूरी हुंदी आई,

दाता जी साहणु रोटी जोगे किता

कारा वाले नाल कोठी जोगे किता

कोडी हीरेया दे मूल विक वाई

मेरी हर गल पूरी हुंदी आई,

मेरे गुरु जी अज मेरे घर आये खुशिया दे सागर विच घोते भी लगवाये,

मेरी जन्मा दी प्यास बुजाई

मेरी हर गल पूरी हुंदी आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।