मेरा डमरू वाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भांग पियाला पीये महा योगी

विष का धार करे विष धारी

नंदी की सवारी करता रूप है जिसका निराला,

मेरा डमरू वाला नील कंठ केहलावे मेरा डमरू वाला

डम डम डमरू बजता रेहता जब मस्ती में आवे,

सारी काया नाथ को शंकर,

भोले आप नचावे,

डमरू बजा के तांडव करता गले नाग की माला,

मेरा डमरू वाला नील कंठ केहलावे मेरा डमरू वाला

अष्ट बुजंगा माथे चंदा नंदी की सवारी,

जटाओ में तेरी गंगा बेहती तांडव के त्रिपुरारी

मेरा डमरू वाला नील कंठ केहलावे मेरा डमरू वाला

मस्ती सरूपा मस्ती का झुटा पिए भांग का प्याला

मेरा डमरू वाला नील कंठ केहलावे मेरा डमरू वाला

आशाये सब की पूरी करते मेरे भोले भंडारी,

तेरी किरपा से लिखता जेपी लधर लिखारी

परगट तेरी महिमा गाये जपे राम की माला

मेरा डमरू वाला नील कंठ केहलावे मेरा डमरू वाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।