चलो गुरुदेव के सपने सजाने की शपथ ले लें

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॥ पावन पाठ ॥

चलो गुरुदेव के सपने सजाने की शपथ ले लें,

सुख ईश्वर धाम से वसुधा बनाने की शपथ ले लें ,

चलो गुरुदेव के सपने, सजाने की शपथ ले लें,

जहां हो रूढ़ियां फैली, बहुत गहरा अंधेरा हो,

न जिसने ने आज तक देखा, कभी उज्जवल सवेरा हो,

हृदय में स्नेह भरकर ज्योति लेकर, ज्ञान की स्वर्णिम,

स्वयं जलकर धरा को, जगमगाने की शपथ ले लें,

चलो गुरुदेव के सपने, सजाने की शपथ ले लें,

पताका देव संस्कृति की, स्वयं हर देश में लेकर,

दवा हर रोग की गुरु के, सहज संदेश में लेकर,

नगर औ गांव में, घर में, डगर के बीच जाएंगे,

अलख गुरुदेव का घर-घर, जगमगाने की शपथ ले लें,

चलो गुरुदेव के सपने, सजाने की शपथ ले लें,

भयंकर आगफैलीहै, जरा सी देर घातक है,

हवा बिल्कुल विषैली है, जरा सी देर घातक है,

इसी पथ से लोकसेवा में, लगायेंगे समय अपना,

पुनः इस विश्व बसुधा को, सजाने की शपथ ले लें,

चलो गुरुदेव के सपने, सजाने की शपथ ले लें,

सतीश गोथरवाल

(8959791036)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।