आसमान से फूलों की बरसात हो गई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आसमान से फूलों की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

गंगा कहे मैं बड़ी, यमुना कहे मैं बड़ी,

काहे की बड़ी मेरी जटा में पड़ी,

मेरी मैया जी शादी भोले से हो गई,

मेरी मैया जी शादी शंकर से हो गई,

चंदा कहे मैं बड़ा, सूरज कहे मैं बड़ा,

काहे के बड़े, मेरे माथे पे सजे,

मेरी मैया जी शादी भोले से हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

डमरुँ कहे मैं बड़ा, त्रिशूल कहे मैं बड़ा,

काहे के बड़े मेरे हाथों में पड़े,

मेरी मैया जी शादी भोले से हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

बाघंबर कहे मैं बड़ा, भभूति कहे मैं बड़ी,

काहे के बड़े, मेरे अंगों में पड़े,

मेरी मैया जी शादी भोले से हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

नाग कहे मैं बड़ा, नागिन कहें मैं बड़ी,

काहे के बड़े, मेरे गले में पड़े,

मेरी मैया जी शादी भोले से हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

संत कहे मैं बड़ा, भक्त कहे मैं बड़ा,

काहे के बड़े,मेरे द्वारे पे खड़े,

मेरी मैया जी शादी भोले से हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

आसमान से फूलों की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी शंकर से हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।