भगवान मेरी नईया उस पार लगा देना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन- बचपन की मोहब्बत को

भगवान मेरी नईया, उस पार लगा देना,

अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ll

हम दीन दुखी निर्बल, नित नाम रहे प्रति पल l

यह सोच दरस दोगे, प्रभु आज नही तो कल l

जो बाग लगाया है, फूलों से सजा देना,

भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम शांति सुधाकर हो, तुम ज्ञान दिवाकर हो l

मम हँस चुगे मोती, तुम मान सरोवर हो l

दो बूँद सुधा रस की, हमको भी पिला देना,

भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

रोकोगे भला कब तक, दर्शन को मुझे तुमसे l

चरणों से लिपट जाऊँ, वृक्षों से लता जैसे l

अब द्वार खड़ी तेरे, मुझे राह दिखा देना,

भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मँझधार पड़ी नईया, डगमग डोले भव में l

आओ त्रिशला नंदन, हम ध्यान धरे मन में l

अब तनवर करे विनती, मुझे अपना बना लेना,

भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।