प्रभु अपने चरणों से

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॥ पावन पाठ ॥

धुन- बचपन की मोहब्बत को

प्रभु अपने चरणों से, मुझको न जुदा करना,

जब याद सताए तेरी, दर्शन की दया करना ll

न तपस्वी न ध्यानी, न योगी न ज्ञानी ll

तूँ सर्वस्य दाता मेरा, मैं नीच हूँ अज्ञानी l

भगवन मेरे दोषों पर, मत ध्यान दिया करना,

जब याद सताए तेरी, दर्शन की दया करना ll

जब फँस के माया में, प्रभु तुझको मैं भूल जाऊँ ll

सच्चा भक्ति का रंग, छोड़ विषयों में लग जाऊँ l

तो तुम प्रभु आ करके, मोहे थाम लिया करना,

जब याद सताए तेरी, दर्शन की दया करना ll

मँझधार पड़ी नईया, कोई खेवनहार नहीं ll

इक्क तेरे सिवा प्रीतम, मेरा जग्ग में नहीं कोई l

तूँ सतगुरु दाता मेरा, मोहे थाम लिया करना,

जब याद सताए तेरी, दर्शन की दया करना ll

प्रभु द्वार तेरा तज्ज के, यह दास कहाँ जाए ll

फ़रियादें यहअपनी रो, रो रो तुझे सुनाए l

आवाज़ मेरी सुनकर, पहचान लिया करना,

जब याद सताए तेरी, दर्शन की दया करना ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।