सतगुरु तेरी महिमा को

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

धुन- बचपन की मोहब्बत को

सतगुरु तेरी महिमा को, क्या कहके मैं सुनाऊँ,

ताकत नहीं जिव्हा में, जो गीत तेरे गाऊँ,

सतगुरु तेरी महिमा को, क्या कहके मैं सुनाऊँ ll

पाकर तेरा दर्शन, होता है ये चित्त प्रसन्न l

दर्शन की झलक से ही, खिल जाता है मेरा मन l

सब भूलता हूँ दुःख जब, चरणों में तेरे आऊँ,

सतगुरु तेरी महिमा को,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

जो जीव शरण आवे, रंग भक्ति का वह पावे l

सब भ्रम गँवा कर वह, प्रीत तेरे संग लावे l

इस प्रेम की मूरत पे, बलिहार सदा जाऊँ,

सतगुरु तेरी महिमा को,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दुनियाँ में नहीं कोई, तेरी शान का पाया है l

सब ढूंढ के जग देखा, कोई ना दिखाया है l

तेरी महिमा तूँ ही जाने, कुछ अंत ना मैं जानूँ,

सतगुरु तेरी महिमा को,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं दास तेरा सतगुरु, तूँ ही मेरा स्वामी है l

संयोग से मैं पाया, यह भाग्य निशानी है l

तेरे चरणों की कर सेवा, दिन रात तुझे ध्याऊँ,

सतगुरु तेरी महिमा को,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।