बनी गुट उते मोली है,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बनी गुट उते मोली है,

पहला दरस भगतो माता कोल खोलनी है,

मेरे हाथ विच सेवा है,

दूजा दरस भगतो जिहनू कहंदे मई देवा है,

जीवे तरिया च चंदा है,

कटरे तो आगे वग दी वेखो बाण गंगा है,

माँ ने चिठिया पाइया है,

करलो तयारी भगतो हुन आइया चाडैया

झोला नाम वाला सीवागे,

चरण पादुका दा चरनामत पीवा गे,

किनी सोहनी फुलवाड़ी है,

गरब जून लंग जा आई आदकुवारी है,

आया भगता दा जथा है,

हिमत कर भगता आया हाथी मथा है,

किनी सोहनी रुत शाही है,

दो पल बेठ भगता हूँ सांझी छत आई है,

किना सोहना नजारा है,

पहाडा वाली दा देखो ओह दवारा है,

कूके कोयल काली है,

भेटा चदा भगता आई गुफा निराली है,

भरो घाटी ते जाना है ,

यात्रा सफल होवे गी भरो दरसन पाना है,

भेटा मीत नाल गवा गये,

फिर भुलाई दाती तेरे दर उते अवा गये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।