इंसान बनाके भेजा जिसने

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इंसान बनाके भेजा जिसने

इंसानियत ही देखेगा तेरी

आँखें मूंद के बैठा है पर

नज़रें हैं नहीं फेरी

हैसियत वो देखे ना

तू दिल ना छोटा कर

भरी सोने की थाली

कहाँ रखें जो

फिरता बिन झोली

भोले के दर पे तू

खाली ही चल दे

देगा वो भर के

तू लायक तो बन

बन्दे बन्दे रे बन्दे ओ

तू लायक तो बन बन्दे रे

ये रात बीत है जानी

ये दिन भी ढल है जाना

सुख और दुःख है

दोनों आना जाना

डेरा यहाँ दो दिन

कहाँ कल ठिकाना

जो मिलना हो रब से

तो नज़रें मिला सको

गले वो लगा ले ऐसे करम तेरे

नेकी पे चलना बन्दे और रखना भरोसा रे

बन्दे भोले के दर पे तू खाली ही चल दे

देगा वो भर के तू लायक तो बन

बन्दे बन्दे रे

नेकी पे चलना बन्दे

और रखना भरोसा रे

तेरी कर्मभूमि का तू

नायक तो बन बन्दे बन्दे रे बन्दे ओ

तू लायक तो बन बन्दे रे

देने वाला ना पूछे क्या है लाया तू

पूछे ना क्या काम फिर क्यों आया तू

ओ तन मैला कपड़ा ना देखेगा

पर दिल झांकेगा जरुर

पत्थर बसा भगवान

चेहरों में इंसान ढूंढ लेता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।