धक धक धड़के काळजो तो कुण इने समझाय

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॥ पावन पाठ ॥

धक धक धड़के काळजो तो कुण इने समझाय,

मैं बरजू रे बटाउँड़ा म्हासूं मत ना नेण मिलाय।

खड़ी नीम के नीचे मैं तो एकली,

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली,

ओले छाने देख ली ओले छाने देख ली

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली।

किसे देश से आया भँवर जी किसे देश थे जावेला,

कूण्यां जी रा कुँवर लाड़ला साँची बात बताओला,

में थाने पूछूँ खड़ी कंवर जी एकली,

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली।

परदेशी बलम रसिया म्हे जोवां थारी बाटड़ली,

आवण में थे देर करी तो कइयाँ कटेली रातड़ली,

कर सोल्हा श्रृंगार उडीकू एकली,

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली।

प्रीत लगाकर भूल नहीं ज्याज्यो याद घणी थारी आवेली,

पंगलया री पायलड़याँ थाने झाला देर बुलावेली,

कइयाँ रहूँ ली थारे बिन बालम एकली,

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली।

खड़ी नीम के नीचे मैं तो एकली,

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली,

ओले छाने देख ली ओले छाने देख ली

जातोड़ो बटाऊँ म्हाने छाने छाने देख ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।