॥ पावन पाठ ॥
दोउ जनी हा दोउ जनी
बलम संग सोय गई दोउ जनी
दोउ जनी हा दोउ जनी
बलम संग सोय गई दोउ जनी
दोउ जनी ,
बलम संग सोय गई दोउ जनी ,
एक ब्याही एक अरधी कहावे
दोनों सुगम सुहाग भरी,
बलम संग सोय गई दोनो जनी ,
दोउ जनी हा दोउ जनी
बलम संग सोय गई दोउ जनी,
ब्याही तो उजियार दिखावे,
अरधी लय अधियार खड़ी,
सजन संग सोय गयी दोउ जनी
दोउ जनी हा दोउ जनी
बलम संग सोय गई दोउ जनी,
ब्याही तो सुख निदिया सोवावय,
अरधी दुःख सुख माथे धरी
बलम संग सोय गई दोउ जनी
दोउ जनी हा दोउ जनी
बलम संग सोय गई दोउ जनी,
कहत कबीर सुनो भाई साधु ,
दोनों पिया पियार रहीं ,
बलम संग सोय गई दोउ जनी
दोउ जनी हा दोउ जनी ,
बलम संग सोय गई दोउ जनी