चांद सितारों से हम इसकी मांग सजाएंगे

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॥ पावन पाठ ॥

चांद सितारों से हम इसकी मांग सजाएंगे,

दुल्हन सा प्यारा देश बनाएंगे,

दूर उड़ा कर ले जाएंगे, हम पंछी पिंजरा अपना,

पिंजरा अपना, पिंजरा अपना,

जब तक है पर साथ हमारे आजादी, फिर क्या सपना,

फिर क्या सपना, फिर क्या सपना,

आ सौगंध ये ले, आ सौगंध ये ले,

मांगी हुई रिहाई से तो, प्राण गंवाएंगे,

दुल्हन सा प्यारा देश बनाएंगे,

जिन बागो की कलियों के, होठों पर हो गम के साए,

गम के साए,गम के साए,

पतझड़ की तानाशाही से, फूल ना जिससे खिल पाए,

ना खिल पाए,ना खिल पाए,

आ सौगंध ये ले, आ सौगंध ये ले,

फसले बहारें बनकर तुमको, हम दिखलाएंगे,

दुल्हन सा प्यारा देश बनाएंगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।