सज धज कर बैठी

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साज़ धज कर बेठी मॉ

ओर मन्द मन्द मुस्काए

आओ नज़र उतारे मैया की

मेरी माँ को नज़र न लग जाय।

कोई काजल डिब्बी ले आओ

मेरी माँ को टीका लगा जाओ

मेरी प्यारी प्यारी मैया को

भगतो की नज़र ना लग जाय

जब मैया चलती पग रख कर

पैरो के घुंघरू बोल रहे

इस सुंदर सुंदर पायल को

कंजकों की नज़र ना लग जाये

मेरी माँ का मुखड़ा भोला हैं

चुनरी मे चंदा लिपटा हैं

इस सोने सोने मुखड़े को

चंदा की नज़र न लग जाय

मेरी माँ की लीला न्यारी हैं

तेरी सुंदर शेर सवारी हैं

इस जग की पालन हारी को

कही खुद की नज़र ना लग जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।