तरसी तरसी रे नजरिया आजा मनमोहना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरसी तरसी रे नजरिया आजा मनमोहना,

सूनी सूनी डगरिया आजा मनमोहना,

तरसी तरसी रे नजरिया आजा मनमोहना।

बिरहा अगन को सहते सहते सूखे आँसू बहते बहते,

रूठा सांवरिया आजा मनमोहना

तरसी तरसी रे नजरिया आजा मनमोहना

जाने कब धड़कन रुक जाए,

सदा के लिए पलके झुक जाएं,

ले ले खबरिया,

ले ले खबरिया मेरी अब तो मनमोहना,

तरसी तरसी रे नजरिया......

सूना पड़ा है कदम पे झूला,

सावन भी अब बरसना भूला,

खाली गगरिया आजा मनमोहना,

तरसी तरसी रे नजरिया......

सदियों से दर्शन की चाह में,

सुंदर लाल खड़ा बीच राह में,

बीती उमरिया,

ये सारी उमरियां आजा मनमोहना,

तरसी तरसी रे नजरिया.........

तरसी तरसी रे नजरिया आजा मनमोहना,

सूनी सूनी डगरिया आजा मनमोहना,

तरसी तरसी रे नजरिया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।