मनमोहन तुम रूठ गए तो कौन मेरा जग में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मनमोहन तुम रूठ गए तो कौन मेरा जग में

कान्हा कौन मेरा ज आग में

साथ रहे हो अब ना रहा तो कौन मेरा जग में

कान्हा कौन मेरा ज आग में

ज़िंदगीका कारवाँ रुकता नहीं है

दिल है श्याम तुम बिन धड़कता नहीं है

चलने से पहले मैं गिर गया तो कौन मेरा जग में

कान्हा कौन मेरा ज आग में

तुम्हे क्या नहीं खबर सब कुछ पता है

दिल ये दर्द मेरा हद से गुज़रता है

मिलने से पहले बिछड़ गया तो कौन मेरा जग में

कान्हा कौन मेरा ज आग में

ग़म के मेले में कैसे मुलाकातें हो

मेरे इश्क़ की आखिरी साँसे हो

जीने से पहले मन मर गया तो कौन मेरा जग में

कान्हा कौन मेरा ज आग में

मिलने का रोग जो तुमसे लगा है

छलिया ना तुम छालो ये दास तेरा है

दर्शन से पहले भटक गया तो कौन मेरा जग में

कान्हा कौन मेरा ज आग में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।