कौन सा मंत्र जपूं मैं भगवन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कहीं तो बेबस बिलख रहे हैं, कहीं तो तड़प रहे,

कहीं तो सांसो की गिनती में लाखों भटक रहे,

बंद है तेरे सब दरवाज़े कैसे तुझे मनाएँ,

कितनों को कांधे ना मिल रहे, क्या क्या तुझे बताएं,

(के एक बारी आओ प्रभु, के दरश दिखाओ प्रभु)

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा गिरिजा घर होकर आए

तेरे बिन अब कौन सहारा, कुछ भी समझ ना आये

हर चोंखट पर माथा टेका कहीं तो तू मिल जाये

कौन सा मंत्र जपूं मैं भगवान, तुम धरती पर आओ

दुविधा भारी आन पड़ी है, आकर इसे उठाओ

(के एक वारी आओ प्रभु, के दरश दिखाओ प्रभु)

भजन गायक

(मनीष अनेजा)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।