दौड़ा जाए रै समय का घोड़ा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शिव शिव रटले बन्दे जीवन है ये थोड़ा,

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा,

शिव शिव शिव शिव रट ले बन्दे,

जीवन है ये थोड़ा

दौड़ा जाए रै समय का घोड़ा

ना तेरा ना मेरा बाबू,

इस घोड़े पर प्रभु का काबू,

परम पिता ही इसे चलाता,

दिखा दिखाकर कौड़ा,

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा

पल पल बीत रही जिंदगानी,

कल की चिंता कर ले प्राणी,

ना जाने कब टूट पड़े,

माथे पर काल हथोड़ा,

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा

दसों दिशाओं के दरवाजे,

कहते रोज बुलाकर बाजै,

बता के दुनियाँ वाले तूने,

कितना पुण्य है जोड़ा,

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा

चल भाई कर ले प्रभु की भक्ति,

भक्ति में है अद्भुत शक्ति,

इस भक्ति में है करोड़ों,

लोगो का पथ मोड़ा,

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा

शिव शिव शिव रटले बन्दे,

जीवन है ये थोड़ा,

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा,

शिव शिव शिव शिव रट ले बन्दे,

जीवन है ये थोड़ा

दौड़ा जाए रै, समय का घोड़ा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।