भोले की दीवानी भोले बाबा ने मनाऊ गी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले की दीवानी भोले बाबा ने मनाऊ गी

सासू ने मनाऊ मैं तो ससुरे ने मनाऊ गी

कंधे पे कावाड ने उठा के गंगा जल चडाऊ गी

तीनो लोको के स्वामी ने जाके भोग लगाऊ गी

भोले की दीवानी ........

जेठ ने मनाऊ मैं मैं जेठानी ने ममनाऊगी

नाच नाच के डी जे पे बाबा ने मैं रिजाऊ गी

भोले की दीवानी भोले बाबा ने मनाऊ गी

देवर ने मनाऊ देवरानी ने मनाऊ गी

संग में अपने बाल नंदी ने हरिद्वार ले जाउगी

भोले की दीवानी भोले बाबा ने मनाऊ गी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।