अजब है भोले नाथ ये दरबार तुम्हारा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

अजब है भोले नाथ ये दरबार तुम्हारा

भूत प्रेत नित करे चाकरी सबका यहा गुजारा

अजब है भोले नाथ ये दरबार तुम्हारा

बाघ बैल को हरदम एक जगह पे आके

कभी ना एक दूजे को बुरी नज़र से ताके

कहीं और नहीं देखा हमने ऐसा गजब नज़रा

अजब है भोले नाथ ये दरबार तुम्हारा

गणपति राखे चूहा कभी सर्प नहीं छूआ

भोले सर्प लटकाये कार्तिक मोर नचाये

आज का काम नहीं है तेरा अनुशाषित है सारा

अजब है भोले नाथ ये दरबार तुम्हारा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।