भजन की शुभ बेला नादान करो नित परमेश्वर का ध्यान

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भजन की शुभ बेला नादान करो नित परमेश्वर का ध्यान

यही हमारी सच्छी दौलत,

बाकी स्वप्न समान,

कोई नहीं है प्रभु के जैसा

तेरा अपना भाई,

कृपा सिंधु कहलाते हैं,

वो तब तो श्री रघुराई,

जल में भी पत्थर तैराता,

अपना ये भगवान .........

कृष्ण कन्हाई राघव माधव,

राम श्याम घनश्याम,

पतित उधारन पतित पावन,

उसके अनगिन नाम,

धनुषरधारी वंशीधारी,

कभी नरसिंह भगवान,

भजन की ........

सौप दे उसके हाथों अपनी,

ये जीवन कि डोरी

पार करेंगे भव सागर से ,

जीवन नैया तोरी

बड़ा दयालु है ये राजेन्द्र,

अपना कृपा निधान

भजन की शुभ बेला

नादान करो नित ,

परमेश्वर का ध्यान

गीतकार /गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।