मैनु नाम तेरे दा रंग चड़ेया मैं हो गयी आ मस्तानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना मैं सोनी ना गुन पल्ली ना कोई सुनावल कमाए

करजायवे आवे भूल भुलाके मेरा सोनी नाम धराये

मेरा सोनी नाम धराया मेरा सोनी नाम धराया

मैनु नाम तेरे दा रंग चड्या मैं हो गयी आ मस्तानी

जित्ते देखा चारो पाससे दिखदी तू ही तू है

दिखदी तू ही तू है दिखदी तू ही तू है

नाम तेरे विच गया ये रंगया माँ मेरा लू है माँ मेरा लू है

मैनु कोई ना फर्क नहीं पावेला होव या हानि

मैं मस्ती दे विच रहेंदी आ मैनु आखँ लोग दीवानी।।

मैनु नाम तेरे दा रंग चड़ेया मैं हो गयी आ मस्तानी

ऐ रंगी न रंग चढादे सारे रंग चढादे सारे

काखा नाल होनी नाल करदे वारे न्यारे

खैरा नाल झोली भर दित्ती मेरी बक्शा के हर नादानी

मैं मस्ती दे विच रेहँदी आ मैनु आखँ लोग दीवानी

मैनु नाम तेरे दा रंग चड़ेया मैं हो गयी आ मस्तानी

ऐस जहां नहीं उस जहाँ भी कजले मेरे परदे

जिसदे रेहमत हो गयी तेरी ओ कड़े ना मर्दे

तेरे राजा दे विच मन राजी हुन करदा नई मनमानी

मैं मस्ती दे विच रेहँदी आ मैनु आखँ लोग दीवानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।