गुरु जी मेरी नावी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी मेरी नाव पुरानी हो किस विधि पार लगाओ गे

नाव पुरानी सागर भारी अधर बीच में झोले खा रही

गुरु जी जाने को न हो दया की भली आप लगाओ गे

गुरु जी मेरी नाव पुरानी हो किस विधि पार लगाओ गे

मतलब की है दुनिया सारी बिन मतलब की न है यार

गुरु जी मेरी सुनो कहानी हो के बिगड़ी आप बनाओ गे

रंग फिकर में गिर गई काया मुख दे से मोह और माया

गुरु जी मेरे गिरे नैन ते नीर धीर मेरी आप बंधाओ गे

गुरु जी मेरी नाव पुरानी हो किस विधि पार लगाओ गे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।