हारे के तुम ही सहारे हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हारे के तुम ही सहारे हो ..मेरे श्याम

हारे के तुम ही सहारे हो

खाटू गया मैं तब मैंने जाना, तुम ही हमारे हो

हारे के तुम ही सहारे हो...............

तेरे सिवा मेरे बाबा मेरा कोई नहीं है

क्सिको सुनाऊँ हाल मैं कोई सुनता नहीं है

ओ मेरे शीश के दानी महिमा जबसे है जानी

आया तेरी शरण कर दो कृपा धनवानी

अब मेरी नाव के तुम रखवाले हो

हारे के तुम ही सहारे हो..................।

इस दुनिया की रीत तो बाबा समझ ना आये

धन दौलत के लोभ में जीवन व्यर्थ ही जाए

ओ बाबा मोरछड़ी वाले ये तन मन तेरे हवाले

मुझको से में लेकर दे दो ज्ञान के उजियाले

तेरे ही दरस से दूर अंधियारे हो

हारे के तुम ही सहारे हो..............

कुछ ना मांगू बाबा तुझसे इतना कर दे

मन में केवल वास हो तेरा ऐसा वर दे

तू बिन बोले सब जाने क्या मैं कह के समझाऊं

मझधार फांसी नैया तू चाहे भाव तर जाऊं

इस कलयुग में तुम ही तारनहारे हो

हारे के तुम ही सहारे हो.................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।