राम बिनु तन को ताप न जाई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम बिनु तन को ताप न जाई

राम बिनु तन को ताप न जाई

जल में अगन रही अधिकाई।

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

तुम जलनिधि मैं जलकर मीना।

जल में रहहि जलहि बिनु जीना॥

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा।

दरसन देहु भाग बड़ मोरा॥

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

तुम सद्गुरु मैं प्रीतम चेला।

कहै कबीर राम रमूं अकेला॥

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

राम बिनु तन को ताप न जाई

राम बिनु तन को ताप न जाई

जल में अगन रही अधिकाई।

राम बिनु तन को ताप न जाई॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।