ओ भोले जी न करना तुम इनकार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सावन के मेले में मैं इस बात जाउंगी

डुबकी लगा के भोले हरिद्वार नेहलाऊगी

ओ भोले जी न करना तुम इनकार

अब यो डमरू वाले हम को ऐसे न तरसाओ

वादा किया पिछले सावन वाधा तुम निभाओ

गंगा जी में डुबकी भोले जाके लगाऊ गी

ओ भोले जी न करना तुम इनकार

ना घोटू मैं भांग चाहे जितना जोर लगाना लेना,

पड़ गए छाले हाथो में अब मिक्सी मूल मंगा लेना

तीन लोक के स्वामी सुन ले पीहर जाऊगी

ओ भोले जी न करना तुम इनकार

मान गया इब बात गोरा अपने पीहर मत जावे

बिन तेरे मेरा जी न लागे जो रे गोरा मत आवे

करदे माफ़ तू मने भोले अब न सताऊ गी

ओ भोले जी न करना तुम इनकार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।