है वो दरबार मेहँदीपुर

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

याहा बनती है तकदीरे है वो दरबार मेहंदीपुर

कटे याहा दुःख की जंजीरे है वो दरबार मेहँदीपुर

ना लौटा कोई भी खाली

सवाली बन के जो आया,

मिले दुनिया की जागीरे है वो दरबार मेहँदीपुर

कोई किस्मत का मारा हो हार कर इस के घर आये,

बदले किस्मत की लकीरे है वो दरबार मेहंदीपुर

सतय का बोल भाला है याहा झूठे का मुह काला

मिले इंसाफ जिस तीरे है वो दरबार मेहंदीपुर

लगन तू भी लगा पंकज तेरी बिगड़ी सवर जाए,

मिले प्रभु नाम के हीरे है वो दरबार मेहँदीपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।