थारी काया रो गुलाबी रंग

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

थारी काया रो गुलाबी रंग, उड़ ज्यासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी,

उड़ जासी रै फिको पड़ जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी।

हरा हरा रूंखड़ा उगता बाग में,

हरा हरा रूंखड़ा उगता बाग में,

पान फूल एक दिन झड़ जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ ज्यासी।

सूरज उगीयो ने दोपारां तपीयो,

सूरज उगीयो ने दोपारां तपीयो,

साँझ पड्या सूरज ढळ जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ ज्यासी।

रैण बसेरो पंछी किनो,

रैन बसेरो पंछी किनो,

भोर भई रे पंछी उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ ज्यासी।

ओ जग सर्कस है देख मेरा भाई,

ओ जग सर्कस है देख मेरा भाई,

अरे खेल खत्म होया पछे घर जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ ज्यासी।

ओ तन है भाई पानी रो पतासों,

ओ तन है बीरा पानी रो पतासो,

पाणी रो पतासो बीरा गळ जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ ज्यासी।

कहे देवीदास श्री, भजन करो भाई,

कहे देवीदास श्री, धरम करो भाई,

धरम कमाई थारे सागे जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड जासी,

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ ज्यासी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।