नवरातो के दिनों में आनंद छाया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवरातो के दिनों में आनंद छाया है

भगतो पे भगती का रंग चड के आया है

नवरातो के दिनों में आनंद छाया है

फूलो और कलियों से दरबार सजे है,

भवनों की गलियां ये बाजार सजे है,

देख रोनक ये मन बड़ा मुसकाया है

नवरातो के दिनों में आनंद छाया है,

नाच रहे मंदिरों में भक्त झूम झूम के

खेद रहे डांडिया सबी घुम घुम के

सची शरदा प्रेम से मैया को रिजाया है

नवरातो के दिनों में आनंद छाया है,

घर घर में हो रहे चोंकी जागरण है

हर कोई मैया की लगन में मगन है,

मिलके संगतो ने आज गुणगान है,

नवरातो के दिनों में आनंद छाया है,

नवरातो में मैया होती दयाल है,

खुशियों से सागर करती निहाल है

माँ के चरणों में सब ने सिर झुकाया है

नवरातो के दिनों में आनंद छाया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।