होई जाओ संत सुधारो थारी काया जी

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॥ पावन पाठ ॥

करो तो आछी करो और बुरी विचारो नाय,

कसर पड़े ज्यूँ मति करो इण ओछी उमर रे माय

होई जाओ संत सुधारो थारी काया जी,

अपने धनीयारा मारग झीणा है ओ रावल माल,

समझयोड़ा हो तो झीणो रे मार्ग हालो जी,

रथ ने घोड़ा ने धीमा हाको ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

ऊंडा ऊंडा नीर अथंग जल भरियो जी,

बेरूडा रो थाक नहीं आयो ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

कड़वा रे नीम निम्बोल्या ज्यारी मीठी जी,

कुण नर मिसरी मिलाई है ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

बैठ हथायां माल झूठ मत बोलो जी,

पंच पंचो रे माहि जावे ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

अरे घर री तो खांड करकरी लागे जी,

गुड़ तो चोरी रो मीठो लागे ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

पराई नार आँगणिया में ऊबी जी,

ज्याने बेनर के बतलावो ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

उजड़ खेता में बीज मति बावो जी,

हाँसल हाथ कोनी आवे है ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

दोई कर जोड़ रानी रूपादे जी बोले जी,

अपने धणीयो ने समझाया है ओ रावल माल,

होय जाओ संत सुधारो थारी काया जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।