इतरो अभिमान बंदा केरो करे

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॥ पावन पाठ ॥

इतरो अभिमान बंदा केरो करे,

बंदा केरो करे रै,

कर ले तू जतन हज़ार,

आखिर बंदा जायां ही सरे,

इतरो अभिमान बंदा केरो करे,

बंदा केरो करे रै,

कर ले तू जतन हज़ार,

आखिर बंदा जायां ही सरे।

बड़ा बड़ा भूप बातां बडेरा करे,

हो बातां बडेरा करे रै,

पड़ा रिया धनुष कबाण,

ठावा पर गायां घास चरे,

इतरो अभिमान बंदा केरो करे,

बंदा केरो करे रै,

कर ले तू जतन हज़ार,

आखिर बंदा जायां ही सरे।

दौड़े दिन रात लोभ, अणुथो करे,

लोभ अणुथो करे, रे,

हुवे लो तू बम्बी वाळो रे सांप,

धरती पर पड़ियो लिकटयाँ करे,

इतरो अभिमान बंदा केरो करे,

बंदा केरो करे रै,

कर ले तू जतन हज़ार,

आखिर बंदा जायां ही सरे।

करयोड़ी कमाई खोटी, आडी फिरे,

खोटी आडी फिरे रै,

लेवे कोनी राम जी रो नाम,

सत्संग में बैठ्यो बातां करे,

इतरो अभिमान बंदा केरो करे,

बंदा केरो करे रै,

कर ले तू जतन हज़ार,

आखिर बंदा जायां ही सरे।

कर सत्संग हृदय ध्यान धरे,

हो, हिरदे ध्यान धरे रै,

दास भगत रट राम,

साँवरियों बेड़ो पार करे रे,

इतरो अभिमान बंदा केरो करे,

बंदा केरो करे रै,

कर ले तू जतन हज़ार,

आखिर बंदा जायां ही सरे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।