कान्हा और मेरा कोई नही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मनमोहन घनश्याम जी , आन सवारो काज

लूट ना जाऊ आज में , रखो मेरी लाज

सावरे कान्हा तू मेरी लाज बचाले , लाज बचाले

की और मेरा कोई नही

पर्दा ना उठे मुझे दुनियाँ से उठा ले , दुनियाँ से उठा ले

की और मेरा कोई नहीं …………….

पंचो में दे बैठी जिनको अपना हाथ में

पाँच पति पाकर भी रह गई अनाथ में

हार के बैठे है मुझे जीतने वाले , जीतने वाले

की और मेरा कोई नही………….

दुष्ट मुझे लाया है बालो से खींच के

पाण्डव सब बैठे है आँखों को मीच के

करते है फरियाद खुले बाल ये काले , बाल ये काले

की और मेरा कोई नही…………...

आज मेरी हालत पे आँच अगर आएगी

श्याम मेरी लाज नही तेरी लाज जाएगी

डूब ती नैया को किया तेरे हवाले , तेरे हवाले

की और मेरा कोई नही………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।