ठुमक ठुमक पाव धरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राम नाम लडू बहे कृष्ण नाम बहे घी

सत्य नाम मिश्री बहे तो घोल घोल कर पी'

ठुमक ठुमक पाव धरे रेे कनहींयो रे,

नाचे नन्द लाल नचावे यशोदा मया रे हो जी॥

ठुमक ठुमक पाव ....

दूध नहीं भावे कन्हैया नहीं खावे,

माखन मिश्री को बड़ों है खवीइयो रे हो जी,

ठुमक ठुमक पाव.....

साल गुसाल व कमल नहीं भावे,

काली रे कमरिया रो बड़ों रे उड़इयों रे हो जी,

ठुमक ठुमक पाव......

गित नहीं भावे ऊके राग नहीं भावे,

बांसुरी बजइया रो बजइयो रे हो जी,

ठुमक ठुमक पाव धरे रे कनहींयो रे,

नाचे नंद लाल नचावे यशोदा मया रे हो जी,

कुलदीप परिहार

बांगरोद जिला रतलाम

मो. (7470649182)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।