मेरे नैन चाहते हैं दीदार साँवरे का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे नैन चाहते हैं दीदार साँवरे का,

मेरी साँसों में रमा है बस प्यार साँवरे का,

मेरी साँसों में रमा है बस प्यार साँवरे का,

मेरे नैन चाहते हैं दीदार साँवरे का...

मैं अपने साँवरे के हूँ प्रेम की दीवानी,

अश्कों से लिख रही हूँ ये प्रेम की कहानी,

मेरी बाहें कब बनेगी गल हार साँवरे का,

मेरे नैन चाहते हैं दीदार साँवरे का....

ये आरज़ू है मेरी हो जाऊँ साँवरे की,

एक सोहनी सी झलक बस मैं पाऊँ सांवरे की,

मेरे दिल से कब जुड़ेगा वो तार साँवरे का,

मेरे नैन चाहते हैं दीदार साँवरे का.....

चंदा से कब मिलेगी बतला दो ये चकोरी,

आज़ाद कहता है सूनी पड़ी मंडोरी,

हाथों से मैं करूँगी श्रृंगार सांवरे का,

मेरे नैन चाहते हैं दीदार साँवरे का.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।