कभी फ़ुर्सत हो धनवानों से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कभी फ़ुर्सत हो धनवानों से,

तो श्याम मेरे घर आ जाना,

इस निर्धन की कुटिया में,

एक शाम ओ श्याम बिता जाना,

कभी फ़ुरसत हो धनवानों से,

तो श्याम मेरे घर आ जाना।

मैं निर्धन हूँ मेरे पास प्रभु,

चूरमा मेवा ना मिठाई है,

सोने के सिंघासन है तेरे,

मेरे घर धरती की चटाई है,

यहीं बैठके लख दातार मुझे,

तुम अपनी कथा सुना जाना,

कभी फ़ुर्सत हो धनवानों से,

तो श्याम मेरे घर आ जाना।

मुझको भी सुदामा के जैसा,

तुम मित्र समझकर श्याम मेरे,

मेरी आँख से बहते अश्कों को,

तुम इत्र समझकर श्याम मेरे,

मेरी कुटिया में आकर मुझसे,

तुम अपने चरण धुलवा जाना,

कभी फ़ुरसत हो धनवानों से,

तो श्याम मेरे घर आ जाना।

बड़ी तेज दुःखों की आंधी है,

मन घबराए ओ सांवरिया,

संदीप की आस के दिप कहीं,

बुझ ना जाएं ओ साँवरिया,

हारे के सहारे हो तुम तो,

मुझ को भी धीर बंधा जाना,

कभी फ़ुरसत हो धनवानों से,

तो श्याम मेरे घर आ जाना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।