दुनिया से मैं हार के आया लाज तुही बचा ले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन गुरुदेव भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया से मैं हार के आया लाज तुही बचा ले

जग के पालनहार तुम्ही हो तूम ही जग स्म्बाले

ओ दाता मेरे ओह दाता मेरे

भग्य बनाते हो तुम सब के तुम ही भग्य विध्याता

जन जन्तु में तुम ही बसते तुम से सब का नाता

तू चाहो तो ख़ाक बना दो तुम चाहो तो राजा,

ओ दाता मेरे ओह दाता मेरे

नदिया झरने तुम से दाता तुम ही विशव विध्याता

धरती अम्बर दरिया समंदर तुझमे आन समाता

चाँद और सूरज तेरे जितने तुझसे ही विध्याता

ओ दाता मेरे ओह दाता मेरे

सुधरे कर्म ओ मेरे दाता तूने हाथ बडाये,

किरपा हो गई मुझ पे बैठा थामे आस लगाये,

तू ही मात पिता है मेरा तू ही साथ निबाये

ओ दाता मेरे ओह दाता मेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।